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PALMISTRY

स्त्री हस्त लक्ष्णम्

मत्स्येन सुभगा नारी स्वस्तिकेन च सुप्रजा I
पद्यमेन भूपते: पत्नी जनयेद्भूपतिं सुतम् II
चक्रवर्तिस्त्रीया: पाणौ नन्दावर्तप्रदक्षिण: I
शंखातपत्रकमठा राजमातृत्वसूचका: II

ऐसी स्त्री जिसके हाथ में मछली का निशान पाया जाए, वह स्त्री बहुत भाग्यशाली मानी गयी है I त्रिभुजाकार चिन्ह पाए जाने पर स्त्री बहुत अच्छी संतानों को जन्म देती है I स्त्री के हाथ में पद्म के निशान का पाया जाना उसके रानी होने और भू- स्वामी पुत्र को जन्म देने का सूचक है I स्त्री के हाथ में दाईं ओर मंडल पाए जाने पर स्त्री को चक्रवर्ती सम्राज्ञी समझना चाहिए I इसी प्रकार स्त्री के हाथ में शंख, छाते या धनुष के निशान का पाया जाना यह दर्शाता है कि वह राजपुत्रों की माता बनेगी I
कृषीबलस्य पत्नी स्याच्छकटेन युगेन वा I
चामरांकुशकोदण्डै राजपत्नी भवेद् ध्रुवम् II
अंगुष्ठमूलान्निर्गत्य रेखा यति कनिष्ठिकाम् I
यदि स्यात्पतिहन्त्री सा दूरतस्तां त्येजेतसुधी: II

ऐसी स्त्री जिसके हाथ में गाड़ी अथवा जुए (बैलों के कंधे पर रखे जाने वाले यन्त्र) जैसी आकृति देखने को मिले तो वह निश्चित ही किसान की पत्नी बनती है I इसी प्रकार यदि उसके हाथ में धनुष, अंकुश या चंवर जैसी आकृतियाँ पाई जाएं तो वह रानी होती है I जिस स्त्री के हाथ में अंगूठे के मूल से निकालकर एक रेखा कनिष्ठा (First Finger) तक जा पहुँचे तो वह स्त्री अपने ही पति की मृत्यु का कारण होती है, विद्वान व्यक्ति ऐसी स्त्री को दूर से ही त्याग देते हैं I
त्रिशूलासिगदाशक्तिदुन्दुभ्याकृतिरेखया I
नितम्बिनी कीर्तिमती करेण पृथिवीतले II

जिस नारी के हाथ में गदा, नगाड़े, तलवार या त्रिशूल जैसी आकृति वाली रेखाएं देखने को मिलें, सामुद्रिक शास्त्र में उसे बहुत यशस्विनी माना गया है I
वाजीकुञ्जरश्रीवृक्षयूपेषुयवतोमरै: I
ध्वजचामरमालाभि: शैलकुण्डलवेदिभि: II
शंखातपत्रपद्मैश्च मत्स्यस्वस्तिकसद्रवै: I
लक्षणैड्.कुशाद्यैश्च स्त्रिय: स्यू राजवल्लभा: II

ऐसी स्त्री जिसके हाथ में यज्ञस्तंभ, हाथी, घोडा, यव (जौ), गुर्ज, बिल्ववृक्ष, ध्वजा, क्षुद्रपर्वत, माला, चंवर, कुण्डल, वेदी, छाता, शंख, मछली, कमल पुष्प, त्रिकोणाकार रेखा, रथ अथवा अंकुश जैसी आकृतियां देखने को मिलें, वे स्त्रियां राज करती हैं I
अल्पायेषु लघुच्छिना दीर्घच्च्छिन्ना महायुषे I
शुभं तु लक्षणम् स्त्रीणां प्रोक्तं तु शुभमन्यथा II
अंकुशम् कुण्डलं चक्रं यस्या: पाणितले भवेत् I
पुत्रम् प्रसूयते नारी नरेन्द्रं लभते पतिम् II

स्त्री के हाथ में अंगूठे के नीचे छोटी- छोटी, छिन्न- भिन्न रेखाएं उसकी अल्पायु को दर्शाती हैं I इसके विपरीत यदि ये रेखाएं बड़ी होँ और छिन्न- भिन्न भी होँ तो स्त्री बहुत समय तक जीवित रहती है I ऐसी स्त्री जिसके हाथ में कुण्डल, चक्र या अंकुश की आकृति वाली रेखाएं हो तो वह किसी राजा की पत्नी होती है और एक अतिगुणवान पुत्र को जन्म देती है I
यस्या: पाणितले रेखाप्राकारं तोरणम भवेत् I
अपि दासकुले जाता राज्ञीत्वमधिगच्छति II
रक्ता व्यक्ता गंभीरा च स्निग्धा पूर्णा च वर्तुला I
कररेखांगनाया: स्याच्छुभा भाग्यानुसारत: II

ऐसी स्त्री जिसके हाथ में प्राकार (घेर) अथवा तोरण- सी आकृति वाली रेकें पाई जाएं तो वह दास कुल में जन्म पाकर भी रानी पद प्राप्त करती है I यदि स्त्री की हस्तरेखाएं प्रगाढ़, गंभीर, रक्त वर्ण माला तथा चिकनी होँ तो स्त्री को बहुत भाग्यवान समझना चाहिए I
तुलामानाकृतीरेखा वणिक्पत्नीत्वहेतुका I
गजवांजिवृषाकार करे वामे मृगीदृशाम् II
पाणिपादतले रेखा ताम्रवर्णा नखानि च I
जीववत्सा चिरंजीविपुत्रपोत्र समन्विता II

ऐसी स्त्रियां जिनके दाएं हाथ में तराजू या दण्ड समानाकृति वाली रेखाएं होँ अथवा बाएं हाथ में हाथी, घोडा या बैल जैसी आकृति पाई जाए तो वह स्त्री निश्चय ही किसी वैश्य से विवाहित होती है I ऐसी स्त्री जिसके हाथ तथा पैरों की रेखाएं और नाख़ून ताम्बे जैसे रंग (ताम्र वर्ण) के होँ, वह दीर्घायु पुत्र तथा पौत्र प्राप्त करती है I
रेखा प्रसादवज्राभा सूते तीर्थकरं सुतम् I
कृषीबलस्य पत्नी स्याच्छकटेन मृगेन वा II
यस्या: करतले पद्म पूर्णकुंभं तथैव च I
राजपत्नी त्वमाप्नोति पुत्र पो तरी प्रवर्तते II

ऐसी स्त्री जिसके हाथ में राजमहल, वज्र अथवा देवालय की आकृति- सी रेखाएं होँ, वह एक ऐसे पुत्र को जन्म देती है जो बहुत से तीर्थ करता है I गाड़ी तथा हिरन जैसी आकृतियां पाए जाने पर स्त्री कृषक पत्नी बनती है I ऐसी स्त्री जिसके हाथ में पूरा घड़ा या पदम जैसी आकृतियां हो, वह रानी के समान गुणवती होती है और पुत्र तथा पौत्रों का सुख पाती है I
वृद्धामूले च या रेखा भ्रातृभग्नीप्रदायिका I
कृष्णा: सूक्ष्मा: क्रमेणैव हीनाश्छिच्द्रप्रदायिका II
अंगुष्ठमूलाद्यदि वै तु रेखा स्थूला तथा चक्रकृता च नारी I
अवारिता षण्ड प्रचण्डता च परान्विता शून्यहृदा च खण्डिता II

अंगूठे के नीचे स्त्री के हाथ में पाई जाने वाली रेखा भाई तथा बहनों की प्राप्ति करती है I यदि यह रेखा काले रंग में और क्रमवार पतली होती जाए तो वह भाई तथा बहनों की मृत्यु का कारण होती है I ऐसी स्त्री जिसके अंगूठे के मूल में एक चक्राकार (जंजीर की तरह) रेखा हो और यह रेखा मध्यमा अंगुली तक गई हो, ऐसी स्त्री कुलटा, सभी कुछ नष्ट करने वाली, मनमौजी तथा दूसरे पुरुषों के साथ भोग- विलास में लिप्त रहने वाली होती है I
यस्या: करतले पादे चोधर्वरेखा च दृश्यते I
यदि नीचकुले जाता राजपत्नी भवेद ध्रुवम् II

ऐसी स्त्री जिसके हाथ में या पैर के तलवे में प्रशस्त ऊर्ध्व रेखा (Fate Line) हो, वह भले ही नीच कुल में जन्म ले, रानी पद ग्रहण करती है I
अनामिका भवेच्छिन्ना सा भवेत्कलहप्रिया I
मध्यमा च भवेच्छिन्ना सा नारी कुलटा स्मृता II
तर्जनी च भवेच्छिन्ना विधवा सा प्रकीर्तिता I
कनिष्ठा च भवेच्छिन्ना सा नारी दु:खभागिनी II

इस श्लोक में विभिन्न अंगुलियों पर पाई जाने वाली रेखाओं के कारण उत्पन्न विकारों को बताया गया है I यदि स्त्री के हाथ में अनामिका पर पाई जाने वाली रेखा छिन्न- भिन्न हो तो वह स्त्री क्लेश करती है I मध्यमा पर पाई जाने वाली रेखा में यदि यही त्रुटि पाई जाए तो स्त्री को कुलटा समझना चाहिए I इसी प्रकार तर्जनी पर पाई जाने वाली रेखा छिन्न होने का अर्थ है कि स्त्री अवश्य ही वैधव्य प्राप्त करेगी I कनिष्ठा की रेखा छिन्न होना यह दर्शाता है कि स्त्री बहुत दुःख भोगेगी I
चन्द्रार्धं कलशं त्रिकोणाधनुषी खंगोष्पदं प्रोष्ठिकं
शखं सव्यपदेडथ दक्षिपादे कोणाष्टकं स्वस्तिकम् I
चक्रं छत्रयवांकुशम् ध्वजपवीजम्बूर्ध्वरेखाम्बुजं
बिभ्राणो हरिरुनविंशति महा लक्ष्मयार्चिताडि.ध्रभवेत् II

जिसके उल्टे पैर के तलवे में अर्धचन्द्राकार, त्रिभुज, धनुष, कलश, शून्य, गाय का खुर, मछली तथा शंख ये सभी आठों चिन्ह पाए जाने के साथ- साथ, दाएं पैर में अष्टभुज, चक्र, स्वास्तिक, छाता, जौ (यव), अंकुश, ध्वजा (पताका), जामुन, ऊर्ध्व रेखा (Fate Line ) तथा कमल पुष्प ये सभी ग्यारह चिन्ह पाए जाएं, वह श्री हरि जो कि उन्नीस लक्षण युक्त और श्री महालक्ष्मी द्वारा पूजे जाते हैं, उनके समान होते हैं I
यस्य पादतले पद्यं चक्रं वाप्यथ तीरणम् I
अंकुशं कुलिशं वापि स राजा भवति ध्रुवम् II

ऐसे व्यक्ति जिसके पैर के तलवों में पद्म, चक्र, तोरण तथा अंकुश जैसी आकृतियां मिलें, वह निश्चय ही राजा का पद ग्रहण करता है I
यस्य वृद्धांगुलेर्मूलात्पदे रेखा च दृश्यते I
स राज्यम् लभते नूनं मुक्ते निष्कंटकाम् महीम् II
असमं मूलदेशे तु वज्रं यस्य तु दृश्यते I
अविच्छिन्नं पदं चैव कुलश्रेष्ठो भवेन्नर: II
अपरं पर्वरेखायां राज्यं च परिकीर्तितम् I

जिस व्यक्ति के पैर के तलवे में ऊर्ध्व रेखा अंगूठे के मूल से आरम्भ होकर पूरे तलवे में फैली सी प्रतीत हो, वह निश्चय ही राज्य का स्वामी बनता है I जिस व्यक्ति के तलवे में वज्र का निशान पाया जाए, वह अपने पूरे कुल का प्रधान रहता है I इसी प्राकार पैर की अंगुलियों में पोर रेखाओं के बीच और कोई रेखा मिलने पर वह व्यक्ति राज्य पाता है I
चक्रस्वस्तिकशंखब्जध्वजमीनातपत्रवत् I
यस्या: पादतले रेखा सा भवेत्क्षितिपाड्.गना II
यस्या: पादतले रेखा सा भवेत्क्षितिपाड्.गना I
भवेद्खण्डभोगा च या मध्यांगुलिसंगता II

यदि स्त्री के तलवों (पैर) में चक्र, स्वास्तिक, शंख, ध्वजा, पद्म, मछली तथा छाते की आकृतियां पाई जाएं तो वह रानी होती है I ऐसी स्त्री जिसके तलवे में ऊर्ध्व रेखा मध्यमा अंगुली तक पी जाए, वह रानी होने के साथ- साथ अखण्ड भोगों को भोगने वाली होती है I

पुरुष हस्त लक्ष्णम्

कनिष्ठामूलग: सौम्यो ह्यनामामूलगो रवि: I
मध्यमामूलगो मन्दस्तर्जनीमूलगो गुरु: II
मातृपित्रोरुपर्य्यार: शुक्रो ह्यंगुष्ठमूलग: I
मातृपित्रोरधश्चन्द्रो ज्ञेया खेटस्थिति: क्रमात्

कनिष्ठिका के मूल में बुध, अनामिका के मूल में सूर्य, मध्यमा के नीचे शनि, तर्जनी अंगुली के नीचे बृहस्पति या गुरु, मातृ-पितृ रेखा के ऊपर मंगल, अंगूठे के नीचे शुक्र तथा मातृ-पितृ रेखा के नीचे चन्द्र ग्रहों का स्थान बताया गया है I
अंगुलीषु च सर्वासु पर्वत्रयमुदाहृतम् I
तर्जनीपर्वके चाद्ये मेषस्तिष्ठति सर्वदा II
द्वितीये च वृषो ज्ञेयस्तृतीये मिथुनं स्मृतम् I
अनामापर्वके चाद्ये सदा तिष्ठति कर्कट: II
द्वितीये सिंहको ज्ञेयस्तृतीये कन्यका स्थिता
कनिष्ठापर्वके चाद्ये तुला ज्ञेया मनीषिभि: II
द्वितीये वृश्चिको ज्ञेयस्तृतीये धनुरुच्यते I
मध्यमापर्वके मुरख्ये मृगास्तिष्ठति सर्वदा II
द्वितीये कुम्भको ज्ञेयस्तृतीये मीनको मत: I
एवं द्वादशराशीनां स्थित: प्रोक्ता मया प्रिये II

भगवान शिव के वचनानुसार प्रत्येक अंगुली के तीन- तीन पर्व होते हैं I इन पर्वों से बारह राशियों को दर्शाया गया है I तर्जनी के पहले पर्व में मेष, दूसरे पर्व में वृष तथा तीसरे में मिथुन का समावेश है I अनामिका अंगुली के पहले पर्व में कर्क राशि दूसरे में सिंह तथा तीसरे पर्व में कन्या को दर्शाया गया है I इसी प्रकार कनिष्ठिका के पहले पर्व में तुला है, दूसरे में वृश्चिक है तथा तीसरे पर्व में धनु राशि है I मध्यमा के पहले पर्व में मकर, दूसरे में कुंभ तथा तीसरे पर्व में मीन का स्थान माना गया है I इस प्रकार सभी बारह राशियों का कर्म पूरा होता है I

कराग्रे वसते लक्ष्मी: करमध्ये सरस्वती I
करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम II

- अर्थात इश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति इन हाथों के अग्रभाग (उँगलियों) में सौभाग्य, संपदा एवं ऐश्वर्य की स्वामिनी स्वयं महालक्ष्मी विराजती हैं, हथेली के मध्य भाग में वाणी, बुद्धि, कला, कुशलता, ज्ञान, विज्ञान की जननी देवी सरस्वती जी का निवास है, इसी हथेली के मूल में इस ब्रह्मण के रचयिता, उत्पादक स्वयं ब्रह्मा जी का स्थान है, आईये इसी हथेली के दर्शनों से, इन्ही अपने हाथों पर भरोसा करके, इन्ही उँगलियों से अपने सपनों की बुलंदियों को छूने की दृढ़ तमन्ना से अपने आज के प्रभात की, अपने जीवन की, निश्चय की शुरुआत करें, सुनी होगी न आपने एक छोटी सी पंक्ति -            "अपना हाथ जगन्नाथ" अर्थात सबसे बड़ा इश्वर तो आपका हाथ ही है, यही तो वो हाथ है जिससे अपने, हमने सबने इस सुन्दर संसार के महलों, कृतियों, कलाओं, सुविधाओं, वैज्ञानिक खोजों, मशीनरीयों, उपकरणों आदि का सृजन किया है I वैज्ञानिकों के अनुसार आज तक हमनें जितने भी सूई से लेकर महानतम उपग्रहों (सैटेलाईट) में प्रयुक्त होने वाली मशीनरीयों को बनाया है, यदि उन सबको इकठ्ठा कर लिया जाये तो भी वे सब मिलकर एक इंसानी हाथ का मुकाबला नहीं कर सकते क्योंकि एक भी ऐसी मशीन नहीं बनी जो एक साथ सूक्ष्मतम कलाकृति का निर्माण और पहाड़ तोड़ने जैसा जटिल कार्य एक साथ कर सकें, परन्तु एक अकेला हाथ ये सब कर दिखता है भौतिक दृष्टि से हमारे हाथ मानव जीवन की हलचल का स्त्रोत हैं, इन्ही हस्तरेखाओं में हमारा भुत -भविष्य -वर्तमान छुपा है, ये आड़ी- तिरछी दिखाई देने वाली रेखाएं ही हमारे भाग्य का प्रतिबिम्ब हैं, जीवन का नक्शा है, इसी नक़्शे को देखकर समझकर आप अपने जीवन को श्रेष्ठतम गति दे सकते हैं भाग्य- दुर्भाग्य सब आपकी हथेलियों में छुपा है I "मधुसूदन एस्ट्रोवर्ल्ड" के श्रेष्ठ हस्तरेखाशास्त्रियों के मार्गदर्शन से आप अपनी रेखाओं के गुण- दोषों को पहचान कर आप अपने जीवन का सदुपयोग कर सकते हैं I ये पूरा जीवन आपका अपना है, इसका सदुपयोग करें या दुरूपयोग ये आपके ऊपर निर्भर करता है, आप ज्यों ही हमारे निर्देशन में चलने लगेंगे त्यों ही देखेंगे की आपके हाथ की रेखाएं बदल रही हैं, आपके कदम उन्नति की ओर बढ़ रहे हैं, सफलता, प्रसिद्धि, सम्मान सामने जयमाला लिए खड़ी है, आपकी एक क्लिकिंग ये सब कर सकती है I आपको जितना श्रम, स्वास्थ्य, जीवन, समय मिला है उतना ही गाँधी, लिंकन, टैगोर, टालस्टाय, आइंस्टीन आदी को भी मिला था, फिर क्या कारण है की वे आज भी तारों की तरह आकाश में चमक रहे हैं ओर आप संघर्षों में उठा पटक कर रहे हैं, गुमनामी का जीवन जी रहे हैं, ये सब भाग्य के अंतर के कारण ही है. वः श्रेष्ठ सफलता, विजय श्री आपको भी प्राप्त हो सकती है और यह पूरी तरह से आपके हाथ में है की आप अपनी दुर्बल रेखाओं को बदल दें, दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल दें, याद रखिये की आपके जीवन में चल रही हर मुश्किल और इसका समाधान आपके हाथ की लकीरों में छुपा हुआ है, कुंडलियों का समय, गणनाएं इनमें त्रुटी संभव है किन्तु हाथ तो आपका अपना ही है, यूनिक है, अपने हाथ का प्रिंटआउट हमारे केंद्र को अपनी समस्याओं के साथ भेजिए और शीघ्र ही पाइये उच्चतम समाधान सुखी, सफलता से परिपूर्ण जीवन के लिए........ हैण्डप्रिंट भेजने की विधियां :-

1. श्रेष्ठतम विधि (ब्लैक पेपर द्वारा) :

एक A4 साईज़ के सफ़ेद पेपर को कपूर जलाकर उसके धुंए के उपर इस प्रकार घुमाइये की वो पूरी तरह से काला हो जाएं, फिर अपने दांयीं बांयीं दोनों हथेलियों को अलग अलग पेज के उपर इस प्रकार रखें की अच्छे से प्रिंट आ जाएं, इस दौरान उँगलियों को फैलाकर रखें और और हाथ को हिलायें, दुलायें नहीं I फिर इसको स्कैन करवाकर या ऐसे ही बाक्स में बंद करके हमारे पास भेज दें I

2. दूसरी विधि :

किसी अच्छे डिजिटल कैमरे से दोनों हाथों की पिक्चरें लेकर ई-मेल के द्वारा हमें भेज दें I

STEP1 STEP2 STEP3 STEP4 STEP5
Step1 :

एक ऐसे कक्ष में जहां हवा हिल- डुल ना रही हो, कुछ कपूर की टिकियाँ लेकर किसी बर्तन में रखकर इस प्रकार से जलाएं कि उसमें से काफी मात्रा में और गाढ़े काले रंग का धुआँ निकलने लगें I

Step2 :

एक A4 साइज का पेपर अथवा ड्राइंग शीट लेकर सावधानी पूर्वक इस धुंए के ऊपर तबतक घुमाते रहे जबतक वह कागज पूर्ण रूप से काला न हो जाए I इस काले रंग का गाढ़ापन 75 % से ऊपर नहीं हो क्योंकि बहुत गाढ़ा रंग होने से भी प्रिंट ज्यादा अच्छा नहीं आता और ये तभी हो पायेगा जब इस कागज को आप धुंए के उपरी सिरे पर रखेंगे I इससे कागज के जलने का खतरा भी नहीं रहेगा I

Step3 :

अब इस कागज को सावधानी पूर्वक उल्टा करके (काला सतह ऊपर की ओर रहें) टेबल या फर्श पर रखें फिर अपने हाथों को साफ करके सुखाकरके पुरुष दाहिने हाथ (Right hand ) को एवं स्त्रियाँ बाएं हाथ (Left Hand) को इस तरह से रखें की रखते हुए हाथ या पेपर हिले नहीं I हल्के तरीके से हाथ को दबायें ताकि प्रिंट अच्छा आएं I यदि एक बार में सारी रेखाएं एवं चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field) न आएं या प्रिंट अच्छा न आएं तो इस पूरी क्रिया को दोहराएं I

Step4:

फिर इस प्रिंट को एक डिब्बे में नीचे की तरफ से चिपकाकर साथ ही एक कागज में अपने प्रश्न, अपनी जिज्ञासाएं लिखकर संस्था को इस पते पर डाक द्वारा भिजवा दें ताकि संस्था के हस्त रेखा विशेषज्ञ इसका गहन विश्लेषण करके आपके पास इसकी रिपोर्ट भिजवा दें ओर इसका शुल्क मात्र Rs 250 /- है साथ ही शुल्क अदायगी की रिसिप्ट (Payment Receipt) भी संलग्न (Attach) कर दें I


Address :       Madhusudan AstroWorld Pvt. Ltd

                          1st Floor, Kailash Complex

                          Opp. Quilla Road,

                           Rohtak- 124001

 

Bank Details:     ICICI Bank Account No. :

Step5:

इस तरह के तैयार हेण्ड प्रिंट बोक्स सहित संस्था को आर्डर करके मात्र Rs 100 /- में प्राप्त कर सकते हैं I

हस्तरेखा विज्ञान में हथेली में समस्त ग्रहों के स्थान निर्धारित हैं और सूक्ष्म दृष्टि से देखने पर इनको पहचाना जा सकता है :

1. बृहस्पति (Jupiter) :-

हथेली में इसका स्थान तर्जनी उंगली के मूल में तथा मंगल पर्वत के ऊपर होता है यह स्वभाव से अधिकार, नेतृत्व, संचालन तथा लेखन का देवता विशेष रूप से माना गया है I गुरु का पर्वत इन तथ्यों को भली प्रकार से स्पष्ट करता है I जिन हथेलियों में गुरु का पर्वत सबसे अधिक उभरा हुआ ओर स्पष्ट होता है, उनमें देव तुल्य सभी गुण पाये जाते हैं I ऐसा व्यक्ति जहाँ स्वयं की उन्नति करता है, वहां दूसरों को भी उन्नति देने में सहायक रहता है I ऐसे व्यक्ति अपने स्वाभिमान की रक्षा विशेष रूप से करते हैं I ये विद्वान् न्याय करने वाले, अपने वचनों का निर्वाह करने वाले, परोपकारी तथा समाज में माननीय होते हैं I कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी ये सहसा विचलित नहीं होते, अपितु देश के जो भी उच्च न्यायाधीश या उच्चपदाधिकारी व्यक्ति हैं, उनमें निश्चय ही गुरु पर्वत विकसित अवस्था में होना चाहिए I ऐसे लोगों में यह विशेष क्षमता होती है की वे जनता को अपने विचारों के अनुकूल बना लेते हैं I इनमें धार्मिक भावनाएं जरूरत से ज्यादा होती हैं I

यदि गुरु पर्वत अल्प विकसित या अविकसित होता है, तो उन व्यक्तियों में उपर्युक्त गुणों की न्यूनता समझनी चाहिए I शारीरिक दृष्टि से ये व्यक्ति साधारण डील- डौल के स्वस्थ तथा हंसमुख होते हैं I वाचन तथा भाषण कला में ये व्यक्ति निपुण होते हैं तथा हृदय से ऐसे व्यक्ति दयालु और परोपकारी कहे जाते हैं I आर्थिक पक्ष की अपेक्षा सम्मान तथा यश प्राप्ति की ओर इनका झुकाव कुछ ज्यादा ही होता है I अधिकतर स्वतंत्रता और नेतृत्व के इनमें विशेष गुण पाये जाते हैं I

विपरीत योनी के प्रति इनमें कोमल भावनाएं होती हैं, सुंदर तथा सभी स्त्रियों से इनका मधुर सम्बन्ध रहता है I यदि स्त्रियों के हाथों में यह पर्वत विकसित अवस्था में होता है, तो उनमें समर्पण की भावना विशेष रूप से पाई जाती है I

यदि गुरु पर्वत का झुकाव शनि की ओर हो तो ऐसा व्यक्ति चिंतनशील तथा अपने ही कार्यों में लगा रहने वाला होता है, परन्तु जीवन में पूर्ण सफलता न मिल पाने का कारण धीरे- धीरे उनमें निराशा की भावना आने लग जाती है I स्वभाव से ये व्यक्ति गंभीर तथा अडियल प्रकृति के होते हैं I यदि गुरु पर्वत नीचे की तरफ खिसका हुआ हो तो व्यक्ति को जीवन में कई बार बदनामी का सामना करना पड़ता है, परन्तु साहित्यिक क्षेत्र में ऐसे व्यक्ति पूर्ण सफल होते देखे गए हैं I यदि गुरु पर्वत जरूरत से ज्यादा विकसित हो तो ऐसा व्यक्ति स्वार्थी, घमंडी तथा स्वेच्छाचारी होता है I जिनके हाथों में गुरु पर्वत का अभाव होता है, उनके जीवन में आत्मसम्मान की कमी रहती है I माता- पिता का सुख उन्हें बहुत कम मिल पाता है तथा वह निम्न विचारों से सम्पन्न हल्के स्तर के मित्रों से संबंधित रहते हैं I

यदि इस पर्वत का उभार सामान्यत: ठीक हो तो व्यक्ति में आगे बढ़ने की भावना होती है, परन्तु इनका विवाह शीघ्र हो जाता है ओर इनका गृहस्थ- जीवन सामान्यत: सुखमय रहता है I

यदि उंगलियां नुकीली होँ तथा गुरु पर्वत विकसित हो तो वह व्यक्ति अन्धविश्वासी होता है I इसी प्रकार वर्गाकार उंगलीयों के साथ विकसित गुरु पर्वत हो तो वह एक प्रकार से जीवन में निरंकुश एवं अत्याचारी बन जाता है I यदि उंगलियां बहुत लम्बी होँ और इस पर्वत का विकास ठीक प्रकार से हुआ हो तो वह व्यक्ति अपव्ययी तथा भोगी होता है I यदि गुरु तथा शनि पर्वत बराबर उभरे हुए होँ तथा लगभग एक- दूसरे में मिल गए होँ तो वह व्यक्ति प्रबल भाग्यशाली होता है तथा जीवन में विशेष सफलता प्राप्त करता है I

वस्तुत: गुरु पर्वत जीवन में अत्यधिक सहायक तथा उन्नति की ओर अग्रसर करने वाला पर्वत कहा जाता है I

2. शनि (Saturn) :-

इसका आधार मध्यमा ऊँगली के मूल में होता है I हथेली पर इस पर्वत का विकास असाधारण प्रवृत्तियों का सूचक कहा जाता है I यदि हाथ में इस पर्वत का अभाव हो तो व्यक्ति जीवन में विशेष सफलता या सम्मान प्राप्त नहीं कर पाता I

मध्यमा उंगली को "भाग्य की देवी" कहा जाता है, क्योंकि भग्य रेखा या "फेट लाइन" की समाप्ति इसी उंगली के मूल में होती है I यदि शनि ग्रह पूर्ण विकसित होता है, तो व्यक्ति प्रबल भाग्यवान होता है तथा जीवन में अपने प्रयत्नों से बहुत अधिक उंचा उठता है I विकसित पर्वत होने पर ऐसा व्यक्ति एकांत- प्रिय तथा निरन्तर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने वाला होता है I वह अपने कार्यों में अथवा लक्ष्य में इतना अधिक डूब जाता है की वह घर- गृहस्थी की चिंता ही नहीं करता I स्वभाव से ऐसे व्यक्ति चिडचिडे तथा संदेहशील प्रवृति के होते हैं I ज्यों- ज्यों उम्र बढती जाती है, त्यों-त्यों ये व्यक्ति भी रहस्यवादी बन जाते हैं I शनि पर्वत प्रधान व्यक्ति जादूगर, इंजीनियर, वैज्ञानिक, साहित्यकार अथवा रसायनशास्त्री होते हैं I ऐसे व्यक्ति अपने जीवन में पूर्ण मितव्ययी होते हैं तथा अचल सम्पत्ति में ज्यादा विश्वास रखते हैं I संगीत, नृत्य आदि कार्यों में इनका रुझान कम रहता है I संदेह्शीलता इनके जीवन में बचपन से ही होती है और अपनी पत्नी तथा पुत्रों पर भी संदेह की दृष्टि रखने से नहीं चूकते I

यदि यह पर्वत अत्यधिक विकसित होता है, तो व्यक्ति अपने जीवन में आत्महत्या कर लेता है I डाकू, ठग, लुटेरे आदि व्यक्तियों के हाथों में यह पर्वत जरूरत से ज्यादा विकसित होता है I ऐसे व्यक्तियों का पर्वत साधारणत: पीलापन लिए हुए होता है I इनकी हथेलियां तथा चमड़ी पीली होती है तथा इनके स्वभाव में चिडचिडापन स्पष्ट झलकता है I

यदि शनि पर्वत गुरु पर्वत की ओर झुका हुआ हो तो यह शुभ संकेत कहा जाता है I ऐसे व्यक्ति समाज में आदरणीय स्थान प्राप्त करते हैं तथा समाज में श्रेष्ठ रूप में देखे जाते हैं I परन्तु यदि शनि पर्वत का झुकाव सूर्य की ओर हो तो ऐसे व्यक्ति आलसी, निर्धन तथा भाग्य के भरोसे जीवित रहने वाले होते हैं I इनमें जरूरत से ज्यादा निराशा होती है तथा वे प्रत्येक कार्य का अंधकार पक्ष ही देखते हैं I परिवार वालों से उनको विशेष लाभ नहीं मिल पाता, व्यापार में ये हानि उठाते हैं I

यदि शनि पर्वत पर जरूरत से ज्यादा रेखाएं होँ तो व्यक्ति कायर तथा अत्यधिक भोगी होता है I यदि शनि पर्वत तथा बुध पर्वत दोनों ही विकसित होँ तो वह व्यक्ति एक सफल वैद्य अथवा व्यापारी बनता है और उसके जीवन में आर्थिक दृष्टि से किसी प्रकार का कोई अभाव नहीं रहता I यदि हथेली में शनि पर्वत का अभाव होता है, तो उस व्यक्ति का जीवन महत्वहीन सा होता है I यदि यह पर्वत सामान्य रूप से उभरा हुआ हो तो वह व्यक्ति जरूरत से ज्यादा भाग्य पर विश्वास करने वाला तथा अपने कार्यों में असफलता प्राप्त करने वाला होता है I ऐसे व्यक्तियों के जीवन में मित्रों की संख्या बहुत कम होती है I स्वभाव से ये हठी तथा अधार्मिक होते हैं I

यदि मध्यमा उंगली का सिरा नुकीला हो तथा शनि पर्वत विकसित हो तो व्यक्ति कल्पना- प्रिय होता है, परन्तु यदि उंगली का सिरा वर्गाकार हो तो वह व्यक्ति कृषि अथवा रसायन के क्षेत्र में विशेष उन्नति करता है I

3. सूर्य (Sun) :-

अनामिका उंगली के मूल में तथा हृदय रेखा के ऊपर का जो भाग होता है, वह सूर्य पर्वत कहलाता है I ऐसा पर्वत व्यक्ति की सफलता का सूचक होता है I यदि हाथ में सूर्य पर्वत का अभाव हो तो व्यक्ति अत्यन्त साधारण जीवन व्यतीत करता है I इसलिए जिसके हाथ में सूर्य पर्वत नहीं होता , वह एक प्रकार से गुमनाम जिन्दगी ही व्यतीत करता है I

इस पर्वत का विकास मानव के लिए अत्यन्त आवश्यक है और इस पर्वत के विकास से मानव प्रतिभावान और यशस्वी बनता है I यदि यह पर्वत पूर्ण उन्नत, विकसित तथा गुलाबीपन लिए होता है, तो वह व्यक्ति अपने जीवन में अत्यन्त उंचे पद पर पहुँचता है I ऐसा व्यक्ति स्वभाव से हंस- मुख तथा मित्रों में घुल मिल कर काम करने वाला होता है I इनकी बातें और इनके कार्य समाचार बन जाते हैं तथा जन्सधार्ण में ये व्यक्ति अत्यन्त लोकप्रिय होते हैं I ऐसे व्यक्ति सफल कलाकार, श्रेष्ठ संगीतज्ञ तथा यशस्वी चित्रकार होते हैं I इन लोगों में प्रतिभा जन्मजात होती है I एक दूसरे के व्यवहार में ये व्यक्ति ईमानदारी बरतते हैं तथा वैभवपूर्ण जीवन बिताने के ये इच्छुक होते हैं I सही रूप में देखा जाये तो ये व्यक्ति व्यापार में विशेष लाभ उठाते हैं तथा इनके जीवन में आय के स्त्रोत एक से अधिक होते हैं I

ये पूर्ण रूप से भौतिक होते हैं तथा सामने वाले व्यक्ति के मन की थाह तक पहुंचने में अत्यन्त सक्षम होते हैं I अनपढ़ तथा सामान्य घराने के व्यक्ति की हथेली में भी यदि सूर्य पर्वत विकसित हो तो वह व्यक्ति श्रेष्ठ धनी और सम्पन्न होता है I आकस्मिक धन- प्राप्ति इनके जीवन में कई बार होती है तथा इनका रहन- सहन अत्यंत राजसी तथा वैभवपूर्ण होता है I

हृदय से ये व्यक्ति साफ़ होते हैं तथा अपनी गलती को स्वीकार करने में भी हिचकिचाते नहीं I सुलझे हुए मस्तिष्क के धनी ये अपना विरोध सहन नहीं कर पाते तथा खरी- खरी बात सामने वाले के मुंह पर कह देने में विश्वास रखते हैं I ऐसे व्यक्ति ही जीवन में महत्वपूर्ण पदों पर पहुंच सकते हैं तथा कुछ नया कार्य करके दिखा सकते हैं I

यदि हथेली में सूर्य पर्वत नहीं होता तो ऐसा व्यक्ति मन्द- बुद्धि तथा मुर्ख होता है I यदि यह पर्वत कम विकसित होता है, तो उस व्यक्ति में सौंदर्य के प्रति रूचि तो होती है, परन्तु वे उसमें पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं कर पाते I अत्यन्त श्रेष्ठ तथा सुविकसित सूर्य पर्वत आत्म- विश्वास, सज्जनता, दया, उदारता तथा धन- वैभव का सूचक होता है I ऐसे व्यक्ति सभा वगैरह में लोगों को प्रभावित करने की विशेष क्षमता रखते हैं I इनका आदर बहुत उंचा होता है I

यदि यह पर्वत जरूरत से ज्यादा विकसित हो तो वह व्यक्ति अत्यधिक घमण्ड करने वाला तथा झूठी प्रशंसा करने वाला होता है I ऐसे व्यक्तियों के मित्र सामान्य स्तर के लोग होते हैं I ये फिजूल खर्च तथा बात- बात पर झगड़ने वाले होते हैं I ऐसे व्यक्ति अपने जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं कर पाते I

यदि सूर्य पर्वत शनि की ओर झुका हो तो ऐसे व्यक्ति एकांत- प्रिय तथा निराशावादी भावनाओं से ग्रस्त रहते हैं I ऐसे व्यक्तियों के मित्र सामान्य स्तर के लोग होते हैं I ये फिजूल खर्च तथा बात- बात पर झगड़ने वाले होते हैं I ऐसे व्यक्ति अपने जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं कर पाते I यदि सूर्य पर्वत शनि की ओर झुका हुआ हो तो ऐसे व्यक्ति एकान्त- प्रिय तथा निराशावादी भावनाओं से ग्रस्त रहते हैं I इनके जीवन में धन की कमी हमेशा बनी रहती है I किसी भी कार्य को ये पूर्ण जोश से प्रारम्भ करते हैं, परन्तु जितनी उमंग और जोश से ये कार्य प्रारम्भ करते हैं, परन्तु जितनी उमंग और जोश से ये कार्य प्रारम्भ करते हैं, उसी उमंग से कार्य को पूरा नहीं कर पाते I कार्य को बीच में ही अधुरा छोड़कर किसी नए कार्य की ओर झुका हुआ पर्वत भाग्यहीनता का सूचक है I

यदि यह पर्वत बुध की ओर झुका हो तो व्यक्ति एक सफल व्यापारी तथा श्रेष्ठ धनवान होता है I ऐसे व्यक्ति समाज में सम्माननीय स्थान प्राप्त करने में सफल होते हैं I

यदि सूर्य की उंगली बेडौल होती है, तो वह सूर्य के गुणों में न्यूनता ला देती है I ऐसे व्यक्ति में बदले की भावना बढ़ जाती है तथा लोगों से व्यवहार करते समय वह सावधानी नहीं बरतता , यदि सूर्य पर्वत पर जरूरत से ज्यादा रेखाएं होँ तो वह व्यक्ति बीमार रहता है I यदि सूर्य उंगली का सिरा कोणदार हो तो वह व्यक्ति कला के क्षेत्र में विशेष रूचि लेता है I वर्गाकार सिरे व्यावहारिक कुशलता तथा नुकीले सिरे आदर्शवादिता के सूचक कहे जाते हैं I

4. बुध (Mercury) :-

कनिष्ठका उंगली के मूल में जो भाग फूला हुआ अनुभव होता है, वाही बुध पर्वत कहलाता है I यह पर्वत भौतिक संपदा एवं भौतिक समृद्धि का सूचक होता है, इसीलिए आज के युग में इसका महत्त्व जरूरत से ज्यादा माना जाता है I बुध प्रधान व्यक्ति अपने जीवन में जिस कार्य में भी हाथ डालते हैं, उसमें पूरी- पूरी सफलता प्राप्त कर लेते हैं I ये व्यक्ति उर्वर मस्तिष्क वाले, तीव्र बुद्धि तथा परिस्तिथियों को भली प्रकार से समझने वाले होते हैं I अपने जीवन में ये व्यक्ति जो भी कार्य करते हैं, उसे योजनाबद्ध तरीके से करते हैं और इनके हाथों से जो भी कार्य प्रारम्भ होता है, उसे पूरा होना ही पड़ता है I

बुध पर्वत का जरूरत से ज्यादा उभार उचित नहीं कहा जा सकता I जिन हथेलियों में बुध पर्वत जरूरत से ज्यादा विकसित होता है, वह चालक और धूर्त होता है तथा ऐसे व्यक्ति लोगों को धोखा देने में पटु होते हैं I यदि बुध पर्वत सामान्य विकसित हो और उस पर वर्ग के आकार का चिन्ह दिखाई दे जाये तो वह व्यक्ति बहुत उंचे स्तर का अपराधी होगा, ऐसा समझना चाहिए I ये व्यक्ति कानून तोड़ने में विश्वास रखते हैं तथा अस्थिर मति वाले ऐसे व्यक्ति समाज- विरोधी कार्य करने में चतुर होते हैं I

जिनके हाथों में बुध पर्वत सही रूप से विकसित होता है, वे मनोविज्ञान के क्षेत्र में माहिर होते हैं तथा सामने वाले व्यक्ति को किस प्रकार प्रभावित करना करना चाहिए, इस बात को ये भली प्रकार से जान लेते हैं I ऐसे व्यक्ति व्यापारिक कार्यों में विशेष सफलता प्राप्त करते हैं I जिनके हाथों में बुध पर्वत विकसित होता है वे व्यक्ति अवसरवादी होते हैं, ठीक समय की तलाश में रहते हैं और समय का पूरा- पूरा उपयोग करने में ये दक्ष माने जाते हैं I ऐसे व्यक्ति सफल वक्ता होते हैं I एक प्रकार से देखा जाये तो ऐसे व्यक्ति पूर्णत: भौतिकवादी कहे जाते हैं I धन- संचय करने में ये उचित- अनुचित आदि का कोई ख्याल नहीं रखते I दर्शन, विज्ञान, गणित आदि कार्यों में ये विशेष रूचि लेते हैं तथा ऐसे व्यक्ति जीवन में श्रेष्ठ वकील, श्रेष्ठ वक्ता तथा श्रेष्ठ अभिनेता होते हैं I लेखन के क्षेत्र में भी ऐसे व्यक्ति प्रसिद्धि पाते देखे गए हैं I यात्राओं के ये शौकीन होते हैं तथा घूमना इनकी प्रिय हाबी होती है I ऐसे व्यक्ति अपने जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त करते हैं I

यदि बुध पर्वत जरूरत से ज्यादा उभरा हुआ होता है, तो ऐसे व्यक्ति धन के पीछे पागल रहते हैं और धन संचय करना ही ये अपने जीवन का उद्देश्य मानते हैं I यदि बुध पर्वत सूर्य की ओर झुका हुआ हो तो ऐसे व्यक्ति जीवन में आसानी से पूर्ण सफलता प्राप्त कर लेते हैं I साहित्यकार व वैज्ञानिक आदि के हाथों में ऐसा ही बुध पर्वत देखा जाता है I यदि व्यक्ति के हाथ की हथेली लचीली हो तथा उस पर बुध पर्वत का पूरा उभार हो तो व्यक्ति अपने प्रयत्नों से लाखों रुपया इकठ्ठा करता है I यदि हथेली पर बुध पर्वत का अभाव हो तो उसका जीवन दरिद्रता में ही व्यतीत होता है I यदि सामान्य रूप से बुध पर्वत विकसित हो तो आविष्कार तथा वैज्ञानिक कार्यों में उसकी रूचि होती है, यदि कनिष्ठका उंगली का सिरा नुकीला हो तथा बुध पर्वत विकसित हो तो वह व्यक्ति वाकपटु होता है I यदि सिरा वर्गाकार हो तो व्यक्ति में तर्क- बुद्धि की बाहुल्यता रहती है I चपटा सिरा भाषण- कला में विशेष दक्षता प्रदान करता है, यदि कनिष्ठका उंगली छोटी हो तो व्यक्ति सूक्ष्म बुद्धि रखने वाला होता है I लम्बी उंगलियों के साथ विकसित बुध पर्वत हो तो वह व्यक्ति स्त्रियों के प्रति विशेष आसक्ति रखने वाला होता है I यदि यह उंगली गांठदार हो तो ऐसा व्यक्ति दृढसंकल्प का धनी होता है I यदि हाथों की उंगलियां लम्बी और पीछे की और मुड़ी हुई होँ तो ऐसा व्यक्ति धोखा देने में विशेष माहिर होता है I यदि बुद्ध पर्वत अपने आप में पूर्णत: श्रेष्ठ एवं विकसित हो तो ऐसा व्यक्ति पूर्ण सफलता प्राप्त कर सकता है I

5. शुक्र (Venus) :-

अंगूठे के दुसरे पौरुए के नीचे तथा आयु रेखा से जो घिरा हुआ स्थान होता है उसे हस्त रेखा विशेषज्ञ शुक्र पर्वत के नाम से संबोधित करते हैं I यूनान में शुक्र को "सुन्दरता की देवी" खा गया है I जिसके हाथ में शुक्र पर्वत श्रेष्ठ स्तर का होता है वह व्यक्ति सुंदर तथा पूर्ण सभी होता है I ऐसे व्यक्ति का स्वास्थ्य जरुरत से ज्यादा अच्छा होता है, उसके व्यक्तित्व का प्रभाव सामने वाले व्यक्ति पर विशेष रूप से रहता है I ऐसे व्यक्ति में साहस और हिम्मत की कमी नहीं रहती I यदि किसी व्यक्ति के हाथ में यह पर्वत कम विकसित हो तो वह व्यक्ति कायर तथा दब्बू स्वभाव का होता है I

जिन लोगों के हाथ में शुक्र पर्वत जरुरत से ज्यादा विकसित होता है, वह व्यक्ति भोगी तथा विपरीत सेक्स के प्रति लालायित रहते हैं I यदि किसी के हाथ में शुक्र पर्वत का अभाव होता है, तो वह व्यक्ति वीतरागी, साधू तथा सन्यासी की तरह होता है I गृहस्थ जीवन में उसकी रूचि नहीं के बराबर होती है I यदि शुक्र का विकास पूरी तरह से हुआ हो, परन्तु उसकी मस्तिष्क रेखा संतुलित न हो तो वह व्यक्ति प्रेम तथा भोग के क्षेत्र में बदनामी प्राप्त करता है I ऐसे व्यक्तियों को प्रेम वासना प्रधान ही कहा जा सकता है I

शुक्र पर्वत का उभार व्यक्ति को तेजस्वी और लावण्यमान बना देता है I इसके चेहरे में कुछ ऐसा आकर्षण होता है, जिसकी वजह से लोग बरबस उसकी ओर आकृष्ट रहते हैं I मुसीबतों को भी ये व्यक्ति हँसते- हँसते शं करते हैं तथा अपने कार्यों एवं कर्तव्यों के प्रति पूर्णत: जागरूक रहते हैं I सुंदर एवं कलात्मक वस्तुओं के प्रति इनका रुझान स्वभाविक ही होता है I यदि हथेली खुरदरी हो तथा उस पर शुक्र पर्वत बहुत ज्यादा विकसित हो तो वह व्यक्ति भोगी होता है I ऐसे व्यक्ति भौतिक सुखों के दस होते हैं, परन्तु यदि हथेली चिकनी एवं मुलायम हो तथा उस पर शुक्र पर्वत पूर्णत: विकसित हो तो ऐसे व्यक्ति एक सफल प्रेमी तथा उत्कृष्ट कोटि के कवि होते हैं I

शुक्र पर्वत की अनुपस्थिति व्यक्ति के जीवन में दुःख तथा परेशानियाँ भर देती हैं I यदि शुक्र पर्वत सामान्य रूप से विकसित हो तो वह व्यक्ति सुंदर, शुद्ध प्रेम भाव रखने वाला तथा संवेदनशील होता है I यदि शुक्र पर्वत मंगल की ओर झुका हुआ हो तो वह प्रेम के क्षेत्र में कोमलता नहीं बरतता I उनके जीवन में बलात्कार की घटनाएं जरुरत से ज्यादा होती हैं I

शुक्र प्रधान व्यक्तियों को गले का रोग विशेष रूप से रहता है I ऐसे व्यक्ति इश्वर पर आस्था नहीं रखते I इनके जीवन में मित्रों की संख्या बहुत अधिक होती है तथा ये अपने जीवन में प्रेम ओर सौन्दर्य को ही अपना सब कुछ समझते हैं I

यदि अंगूठे का सिरा कोणदार हो तथा शुक्र पर्वत विकसित हो तो वह व्यक्ति कलात्मक रूचि वाला होता है I यदि अंगूठे का सिरा वर्गाकार हो तो ऐसा व्यक्ति समझदार और तर्क से काम लेने वाला माना जाता है, फैला हुआ सिरा व्यक्ति में दयालुता की भावना भर देता है I वस्तुत: शुक्र प्रधान व्यक्ति ही इस सुन्दर दुनिया को अच्छी तरह से पहचान सकते हैं और उसका आनंद उठा सकते हैं I

6. मंगल (Mars) :-

हथेली में दो मंगल होते हैं, जिन्हें उन्नत मंगल तथा अवनत मंगल कहा जाता है I जीवन रेखा के प्रारम्भिक स्थान के नीचे और उससे घिरा हुआ शुक्र पर्वत के ऊपर जो फैला हुआ भाग है, वही मंगल पर्वत कहलाता है I मूल रूप से यह पर्वत युद्ध का प्रतीक माना जाता है I मंगल प्रधान व्यक्ति साहसी, निडर तथा शक्तिशाली होते हैं I

जिन हाथों में मंगल पर्वत बलवान होता है, वे कायर या दब्बू नहीं होते I ऐसे व्यक्तियों के जीवन में दृढ़ता और संतुलन होता है I अगर हथेली में मंगल पर्वत का अभाव होता है, तो उस व्यक्ति को कायर समझ लेना चाहिए I

मंगल पर्वत प्रधान व्यक्ति हृष्टपुष्ट तथा पूरी लम्बाई लिए होते हैं I धीरजता तथा साहस इनका प्रधान गुण होता है I जीवन में ये अन्याय तो रत्ती- भर भी सहन नहीं करते I ऐसे व्यक्ति पुलिस विभाग में या मिलिट्री में अत्यन्त उंचे पद पर पहुंचते हैं I शासन करने का इनमें जन्मजात गुण होता है तथा ऐसे ही व्यक्ति समाज में नेतृत्व करने में सक्षम होते हैं I

यदि मंगल पर्वत बहुत ज्यादा विकसित हो तो वह व्यक्ति दुराचारी, अत्याचारी तथा अपराधी होता है I समाज विरोधी कार्यों में वह हमेशा आगे रहता है I उसका स्वभाव लड़ाकू होता है I अपनी बात को जबरदस्ती से मनवाने का यह आदि होता है I ऐसे व्यक्ति बात- बात पर लड़ने वाले, अपने अधिकारों के लिए सब कुछ बलिदान करने वाले, लम्पट तथा धूर्त होते हैं I

यदि मंगल पर्वत का झुकाव शुक्र क्षेत्र की ओर हो तो यह बात निश्चित समझनी चाहिए की उस व्यक्ति के सदगुणों की अपेक्षा दुर्गुण विशेष होंगे I यही नहीं अपितु प्रत्येक आवेग की तीव्रता होगी I ऐसे व्यक्ति यदि शत्रुता रखेंगे तो भयंकर शत्रु होंगे और यदि मित्रता का व्यवहार करेंगे तो अपना सब कुछ बलिदान करने के लिए तैयार रहेंगे I ऐसे व्यक्ति झूठी शान- शौकत, व्यर्थ का आडम्बर तथा प्रदर्शन प्रिय होते हैं I यद्यपि ये स्वयं डरपोक होते हैं, परन्तु दूसरों को गीदड़ भभकी देकर काम निकालने में माहिर होते हैं I

सही रूप में देखा जाये तो ऐसे व्यक्ति रूखे "कर्कश एवं कठोर" होते हैं I यदि मंगल पर्वत पर रेखाएं विशेष रूप से दिखाई दें तो यह समझ लेना चाहिए कि ऐसा व्यक्ति युद्ध प्रिय होता है I आगे चलकर इस प्रकार का व्यक्ति या तो सेनाध्यक्ष बनता है अथवा भयंकर डाकू बन जाता है I जोश दिलाने पर ये सब कुछ बलिदान करने के लिए तैयार रहते हैं I मंगल पर्वत पर त्रिकोण, चतुर्भुज या किसी प्रकार के बिंदु शुभ नहीं कहे जाते I ऐसे चिन्ह व्यक्ति के रोग को स्पष्ट करते हैं और रक्त से संबंधित बीमारी उनके जीवन में बराबर बनी रहती है I

यदि मंगल पर्वत भली प्रकार से विकसित हो तथा साथ ही हथेली का रंग भी लालिमा लिए हो तो वह व्यक्ति निश्चय ही उंचा पद प्राप्त करता है I अपने जीवन में वह संघर्षों एवं बाधाओं कि परवाह न करके अपने लक्ष्य तक पहुंच जाने में पूर्ण सफलता प्राप्त करता है I पीला रंग व्यक्ति को अपराध भावना कि ओर प्रवृत्त करता है I यदि हथेली का रंग सामान्य नीलापन लिए हुए हो तो ऐसा व्यक्ति गठिया का रोगी होता है I ऐसे व्यक्ति महत्वकांक्षी होते हैं और अपना लक्ष्य इन्हें बराबर ध्यान में रहता है I जीवन में ये अपने लक्ष्य कि ओर बराबर बढ़ते रहते हैं I यदि ये व्यापार के क्षेत्र में प्रवेश करें तो मेडिकल आदि में विशेष सफलता प्राप्त कर सकते हैं I यदि मंगल पर्वत उभरा हुआ हो और हाथ कि उंगलियां कोणदार होँ तो व्यक्ति आदर्श प्रिय होता है I वर्गाकार उंगलियां इस बात का सूचक होती हैं कि वे व्यक्ति व्यवाहरिक तथा जीवन में फूंक- फूंक कर कदम रखने वाले होते हैं I ऐसे व्यक्ति चतुर और चालाक होते हैं तथा अपने हितों कि ओर विशेष ध्यान रखते हैं I यदि उंगलियां गठीली होँ तथा मंगल पर्वत उन्नत हो तो व्यक्ति तर्क करने वाला तथा अपने जीवन में सोच- समझकर कार्य करने वाला होता है I यदि मंगल पर्वत पर क्रास का चिन्ह दिखाई दे तो उस व्यक्ति कि मृत्यु निश्चय ही युद्ध में या चाकू लगने से होती है I यदि मंगल पर्वत पर आड़ी- तिरछी रेखाएं होँ और उससे जाल सा बन गया हो तो निश्चय ही उसकी मृत्यु दुर्घटना के फलस्वरूप होती है I

वस्तुत: मंगल पर्वत से ही व्यक्ति साहसी, निर्भीक और स्पष्ट वक्ता बनता है I

7. चन्द्र (Moon) :-

चंद्रमा मनुष्य का सबसे निकटतम ग्रह है I इसलिए इसका प्रभाव भी मनुष्य पर सबसे अधिक पड़ता है I सही रूप में यह ग्रह "सुन्दरता और कल्पना" का ग्रह कहा जाता है I

हथेली में आयु रेखा से बायीं ओर तथा मणिबंध से ऊपर एवं नेपच्यून क्षेत्र से नीचे भग्य रेखा से मिला हुआ जो क्षेत्र है, वह चन्द्र पर्वत कहलाता है I जिन व्यक्तियों के हाथों में चन्द्र पर्वत विकसित होता है, वे व्यक्ति कोमल, रसिक एवं भावुक होते हैं I

जिनके हाथों में चन्द्र पर्वत पूर्णत: उभरा हुआ होता है, वे प्रकृति-प्रिय एवं सौन्दर्यप्रिय होते हैं I ऐसे लोग वास्तविक जीवन से हटकर स्वप्नलोक में ही विचरण करते हैं I इनके जीवन में कल्पनाओं का कोई अभाव नहीं रहता I एक प्रकार से ये व्यक्ति अपने आप में ही खोये हुए होते हैं I जीवन की कठोरताओं को तथा मुसीबतों को ये झेल नहीं पाते और थोड़ी सी भी परेशानी आने पर ये विचलित हो जाते हैं I ऐसे व्यक्ति संसार के छल- कपट से दूर तथा एक शांत और कल्पनामय जग में विचरण करने वाले कहे जाते हैं I ऐसे ही व्यक्ति उत्तम कोटि के कलाकार, संगीतज्ञ और साहित्यकार होते हैं I इनके विचारों में धार्मिकता विशेष रूप में होती है, किसी के दबाव में ये कार्य नहीं कर पाते I इनके विचार स्वतंत्र एवं स्पष्ट होते हैं I

जिनके हाथों में चन्द्र पर्वत का अभाव होता है, वे व्यक्ति कठोर हृदय एवं पूर्ण भौतिकवादी होते हैं I जिनके जीवन में युद्ध ही प्रधान होता है, उनके हाथों में चन्द्र पर्वत का अभाव स्पष्ट देखा जा सकता है I

जिनका चन्द्र पर्वत भली प्रकार से विकसित होता है, वे भौतिकवादी न होकर कल्प्नावादी होते हैं I प्रेम तथा सौन्दर्य उनके जीवन की कमजोरी होती है, परन्तु सांसारिक छल- प्रपंचों को न समझ पाने के कारण उनका प्रेम जीवन दुखांत ही होता है I यदि चन्द्र पर्वत जरूरत से ज्यादा विकसित हो तो यह व्यक्ति पागल होता है I

यदि चन्द्र पर्वत मध्यम स्तर का विकसित हो तो ऐसा व्यक्ति कल्पनालोक में विचरण करने वाला तथा हवाई किले बनाने वाला होता है, वे ख़त पर पड़े-पड़े लाखों करोड़ों की योजनाएं बना लेते हैं, पर उनमें एक भी पूरी नहीं हो पाती, या यों कहा जाये कि उनमें उन योजनाओं को पूरा करने की योग्यता अथवा साहस नहीं होता I ऐसे व्यक्ति जरूरत से ज्यादा भावुक होते हैं I छोटी सी भी बात इनको बहुत अधिक चुभती है I छोटा सा भी व्यंग्य इनके पूरे शरीर को झकझोर देता है I ऐसे लोगों में संघर्ष की भावना नहीं के बराबर होती है I विपरीत परिस्थितियों में ये पलायन कर जाते हैं और धीरे- धीरे इनमें निराशा की भावना बढ़ जाती है I

यदि चन्द्र पर्वत विकसित होकर हथेली के बाहर की ओर झुक जाता है, तो ऐसे व्यक्ति में रजोगुण की प्रधानता बन जाती है I ऐसे व्यक्ति भोगी, विषयी तथा कमी हो जाते हैं एवं सुंदर स्त्रियों के पीछे व्यर्थ के चक्कर लगाते रहते हैं I इनके जीवन का ध्येय भोग- विलास एवं ऐयाशी होता है, परन्तु जीवन में ये सुख भी उनको नसीब नहीं होता I

 

यदि हथेली में यह पर्वत शुक्र की ओर झुकता हुआ अनुभव हो तो ऐसे व्यक्ति कामुक होने के साथ- साथ निर्लज्ज भी होते हैं I इनको अपने- पराये का भी भेद नहीं रहता, जिसके फलस्वरूप वे व्यक्ति समाज में बदनाम हो जाते हैं I

यदि चन्द्र पर्वत पर आड़ी- टेढ़ी रेखाएं फैली हुई दिखाई दें तो ऐसा व्यक्ति कई बार जल यात्राएं करता है I यदि चन्द्र पर्वत पर गोल घेरा हो तो वह व्यक्ति राजनितिक कार्य से विदेश की यात्रा करता है I यदि हाथ में चन्द्र पर्वत का अभाव हो तो वह व्यक्ति रुखा और पूर्णत: भौतिक होता है I परन्तु जिनका चन्द्र पर्वत सामान्य रूप से उभरा हुआ होता है, वे आंतरिक दृष्टि से अत्यधिक सुंदर एवं समझदार होते हैं I यदि यह पर्वत ऊपर की ओर से उभरा हुआ होता है, तो उसे गठिया और जुकाम जैसे रोग बने रहते हैं I यदि यह पर्वत जरूरत से ज्यादा विकसित हो तो वह अस्थिर बुद्धि का, निराश, वहमी तथा लगभग पागल-सा होता है I इसको सर दर्द की शिकायत बराबर बनी रहती है I यदि यह पर्वत नीचे की तरफ खिसका हुआ हो तो वह व्यक्ति शक्तिहीन होता है I यदि चन्द्र पर्वत पर शंख का चिन्ह हो तो वे व्यक्ति अपने ही प्रयत्नों से सफल होते हैं, परन्तु उनकी सफलता में बराबर बाधाएं और परेशानियाँ बनी रहती हैं I इतना होने पर भी वे जीवन को सही रूप से जीने में तथा दूसरों को सहयोग एवं सहायता देने में विश्वास रखते हैं I

वस्तुत: हाथ में चन्द्र पर्वत से ही व्यक्ति कल्पनाप्रिय, सौन्दर्यप्रिय तथा भावुक हो सकता है I

8. हर्षल :-

यदि वास्तव में देखा जाये तो यह ग्रह दूसरे ग्रहों की अपेक्षा ज्यादा बलवान एवं समर्थ होता है I हथेली में इसका क्षेत्र हृदय तथा मस्तिष्क रेखा की बीच में होता है I सही रूप से इसका क्षेत्र भली प्रकार से कनिष्ठिका के नीचे, बुध पर्वत से थोडा सा नीचे अनुभव किया जा सकता है I

इस ग्रह का प्रभाव हृदय तथा मस्तिष्क पर विशेष रूप से होता है I जिन व्यक्तियों ही हथेली में यह पर्वत बुध के नीचे तथा हृदय एवं मस्तिष्क रेखा के बीच में होता है, वह व्यक्ति विश्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक और गणितज्ञ बनता है I अणु, परमाणु, टेलीविजन आदि जटिल यंत्रों के निर्माण तथा रचना में ऐसे व्यक्ति पूर्णत: सफल होते हैं I यदि इस पर्वत का उभार कम होता है, तो ऐसे व्यक्ति मशीनरी से संबंधित कार्यों में रूचि लेते हैं तथा ऐसे ही स्थानों पर नौकरी करके संतुष्ट होते हैं I

यदि इस पर्वत पर त्रिकोण या चतुर्भुज का चिन्ह हो तो वह व्यक्ति आश्चर्यजनक रूप से प्रगति करता है तथा अपने कार्यों से विश्वस्तरीय सम्मान प्राप्त करता है I समाज में उसका सम्मान होता है और उसे अपने जीवन में आशा से अधिक सफलता मिलती है I यदि हर्षल पर्वत से कोई रेखा अनामिका उंगली की ओर जाती है, तो वह व्यक्ति जीवन में विश्व प्रसिद्ध होता है I यदि हर्षल पर्वत का झुकाव बुध पर्वत की ओर विशेष रूप से होता है, तो ऐसा व्यक्ति अपनी प्रतिभा का दुरूपयोग करता है और एक प्रकार से वह व्यक्ति अन्तर्राष्ट्रीय ठग या लुटेरा हो जाता है I ऐसे व्यक्ति हृदय रोग से भी बराबर पीड़ित रहते हैं I यदि हर्षल पर्वत नेपच्यून की ओर झुकता हुआ दिखाई दे तो ऐसे व्यक्ति को पूर्णत: भोगी समझना चाहिए I ऐसा व्यक्ति एक पत्नी से संतुष्ट न होकर भटकता फिरता है I उसका गृहस्थ जीवन एक प्रकार से बरबाद हो जाता है तथा उसे अपनी पत्नी तथा अपने पुत्रों से किसी प्रकार का कोई मोह नहीं होता I जीवन में जरूरत से ज्यादा व्यसनों में लिप्त होकर यह अपना स्वास्थ्य एवं सौन्दर्य खो बैठता है I

9. नेपच्यून :-

यह ग्रह पृथ्वी से बहुत अधिक दूरी पर स्थित होने के कारण इसका प्रभाव पृथ्वीवासियों पर बहुत कम पड़ता है, परन्तु फिर भी इसका प्रभाव मानव जीवन पर जो भी पड़ता है, वह स्थायी होता है और अपने आप में आश्चर्यजनक परिणाम दिखता है I हथेली में इस ग्रह का क्षेत्र मस्तक रेखा से नीचे तथा चन्द्र क्षेत्र से ऊपर होता है I यदि यह क्षेत्र अथवा यह पर्वत विशेष रूप से उभरा हुआ हो तो वह व्यक्ति श्रेष्ठ संगीतज्ञ, कवि अथवा लेखक होता है I यदि इस पर्वत पर रेखा दिखाई दे और यदि वह रेखा आगे चलकर भाग्य रेखा में मिल जाये तो वह व्यक्ति जीवन में अत्यधिक महत्वपूर्ण पद पर पहुंचता है I

यदि इस पर्वत का झुकाव चन्द्र क्षेत्र की तरफ विशेष हो तो उसका स्तर अपने आप में अत्यंत घटिया होता है I ऐसा व्यक्ति संकीर्ण मनोवृत्ति वाला तथा समाज विरोधी कार्य करने वाला होता है I यदि नेपच्यून पर्वत से उठकर कोई रेखा मस्तिष्क रेखा को काट लेती है, तो वह व्यक्ति निश्चय ही पागल होता है तथा उसके जीवन का अधिकतर हिस्सा पागलखाने में ही व्यतीत होता है I

यदि यह पर्वत जरूरत से ज्यादा उभरा हुआ हो तो ऐसे व्यक्ति का जीवन दुखमय होता है तथा उसका गृहस्थ जीवन बरबाद हो जाता है I ऐसे व्यक्ति सनकी, संशयालु तथा क्रूर प्रकृति के माने जाते हैं I यदि नेपच्यून पर्वत विकसित होकर हर्षल से मिल जाता है, तो वह व्यक्ति जीवन में निश्चय ही धन के लालच में किसी की हत्या करेगा, ऐसा समझ लेना चाहिए I ऐसे व्यक्ति अपने कार्यों के प्रति लापरवाह होते हैं तथा कार्य हो जाने के बाद पछताते रहते हैं I

यदि इस पर्वत का क्रास का चिन्ह हो तो उसका पूरा जीवन गरीबी तथा निर्धनता में बीतता है I ऐसे व्यक्ति अपने जीवन की आवश्यकताओं को भी भली प्रकार से पूरा नहीं कर पाते I

10. प्लूटो :-

अंग्रेजी में इस ग्रह को प्लूटो तथा हिन्दी में इसे "इन्द्र" के नाम से पुकारते हैं I हथेली में इसका क्षेत्र हृदय रेखा के नीचे तथा मस्तिष्क रेखा के ऊपर होता है और यह हर्षल तथा गुरु क्षेत्र के बीच में अवस्थित होता है I प्रत्येक व्यक्ति के हाथ में इस पर्वत को स्पष्टता से देखा जा सकता है I

इसका प्रभाव व्यक्ति की वृद्धावस्था में ही देखने को मिलता है I यदि यह पर्वत भली प्रकार से विकसित होता है, तो उस व्यक्ति का बुढ़ापा अपने आप में अत्यंत सुखी एवं सफल रहता है I जीवन के 42वें वर्ष से आगे वह जीवन में सुख अनुभव करने लगता है और मृत्युपर्यन्त वह सभी दृष्टियों से सुखी ही रहता है I यदि प्लूटो पर्वत पर क्रास का चिन्ह हो तो उसकी मृत्यु 45 वर्ष से पहले- पहले दुर्घटना से हो जाती है I यदि यह पर्वत जरूरत से ज्यादा विकसित हो तो वह व्यक्ति असभ्य, मूर्ख, निरक्षर तथा अपव्ययी होता है I इसको जीवन में पग- पग पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है तथा जीवन में परिवार वालों का तथा मित्रों का किसी भी प्रकार का कोई सहयोग नहीं मिलता I यदि यह पर्वत अविकसित हो तो वह व्यक्ति भाग्यहीन माना जाता है I उसका स्वभाव चिडचिडा तथा दुखमय हो जाता है I

11.राहु :-

हथेली में इस पर्वत की स्थिति मस्तिष्क रेखा से नीचे चन्द्र, मंगल तथा शुक्र से घिरा जो भूभाग होता है, वह राहु क्षेत्र कहलाता है I भाग्य रेखा इसी पर्वत पर से होकर शनि पर्वत की ओर जाती है I

राहु का क्षेत्र यदि हथेली पर अत्यंत पुष्ट एवं उन्नत हो तो ऐसा व्यक्ति निश्चय ही भाग्यवान होता है और यदि पुष्ट पर्वत पर से होकर भाग्य रेखा स्पष्ट तथा गहरी होकर आगे बढ़ती है तो वह व्यक्ति जीवन में परोपकारी, प्रतिभावान, धार्मिक तथा सभी प्रकार से सुख भोगने वाला होता है I यदि हथेली पर भाग्य रेखा टूटी हुई हो पर राहु पर्वत विकसित हो तो ऐसा व्यक्ति एक बार आर्थिक दृष्टि से बहुत अधिक उंचा उठ जाता है और फिर उसका पतन हो जाता है I

यदि यह पर्वत अपने स्थान से हटकर हथेली के मध्य की ओर सरक जाता है, तो उस व्यक्ति को यौवनकाल में बहुत अधिक बुरे दिन देखने को मिलते हैं I यदि हथेली के बीच का हिस्सा घर हो और उस पर से भाग्य रेखा टूटी हुई आगे बढ़ती हो तो वह व्यक्ति यौवनकाल में भिखारी के समान जीवन व्यतीत करता है I

यदि राहु पर्वत कम उभरा हुआ हो तो ऐसा व्यक्ति चंचल स्वभाव का तथा अपने ही हाथों अपनी सम्पत्ति का नाश करने वाला होता है I

12.केतु:-

हथेली में इस पर्वत का स्थान मणिबंध के ऊपर शुक्र और चन्द्र क्षेत्रों को बांटता हुआ भाग्य रेखा के प्रारम्भिक स्थान के समीप होता है I इस ग्रह का फल राहु के सामान ही देखा गया है I

इस ग्रह का प्रभाव जीवन के पांचवें वर्ष से बीसवें वर्ष तक होता है I यदि यह पर्वत स्वाभाविक रूप से उन्नत एवं पुष्ट होता है तथा भाग्य रेखा भी स्पष्ट तथा गहरी हो तो वह व्यक्ति भाग्यशाली होता है तथा अपने जीवन में समस्त प्रकार के सुखों का भोग करता है I ऐसा बालक गरीब घर में जन्म लेकर भी अमीर होता देखा गया है I यदि यह पर्वत अस्वभाविक रूप से उठा हुआ हो और भाग्य रेखा कमजोर हो तो उसे बचपन में बहुत अधिक बुरे दिन देखने पड़ते हैं I उसके घर की आर्थिक स्थिति धीरे- धीरे कमजोर होती जाती है तथा शिक्षा के लिए भी ऐसे बालक को बहुत अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है I ऐसा बालक बचपन में रोगी भी होता है I

यदि यह पर्वत अविकसित हो और भाग्य रेखा प्रबल भी हो फिर भी उसके जीवन से दरिद्रता नहीं मिटती, अतः केतु पर्वत विकसित हो और साथ ही भाग्य रेखा भी स्पष्ट और विकसित हो तभी व्यक्ति जीवन में पूर्ण उन्नति कर सकता है I